September 16, 2013

Khoon

खून

काश के खून भी पानी जैसा होता 
न जमता , न जलता , न काला पड़ जाता 

काश के खून भी पानी जैसा होता 
उन्माद सा बहता , उमड़ता 
बिना भेद भाव के , बिना रंग राग के 
बस अपने आगोश में ले लेता 
फिर एक रंग हो कर लहरों सा झूमता 

काश के खून भी पानी जैसा होता
काश...

- मीनाक्षी

10 comments:

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  2. नमस्कार आपकी यह रचना कल मंगलवार (17-09-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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    1. hausla afzai key liye shukriya.

      anugraheet,
      Meenakshi

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  3. सुंदर रचना के लिए आपको बधाई

    संजय भास्‍कर
    शब्दों की मुस्कुराहट
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  4. बहुत खूब ... ये खून पानी हो जाए सबका तो एक सा हो जायेगा ...
    सब एक होंगे ... एक ही बेरंग रंग में रंगे ...

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  5. काश खून भी पानी जैसे होता क्या कल्पना की है मीनाक्षी जी ,बहुत ही सुन्दर प्रस्तुती।

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  6. Aap sabka bahut bahut shukriya

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  7. काश! ऐसा होता. खैर बहुत उम्दा कविता कही है आपने.

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